अंजन बनिक II मॉस्को - रूस, नया दिल्ली - भारत, अगरतला - त्रिपुरा II
विज्ञान और गणित को समझने के लिए भी हमें कहानी और खेल को ही माध्यम बनाना होगा । क्योंकि बच्चे कहानी और खेल में ही ज्यादातर रुचि लेते हैं । सुपर थर्टी आनंद कुमार जी यह बोल रहे थे । विज्ञान संचारक और देश भर की बच्चों में प्रेरणा स्रोत के हिसाब से जाने जाने वाले सुदूर पूर्वोत्तर की त्रिपुरा की विज्ञान शिक्षक, तथा इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम के निर्देशक अंजन बनिक जी की प्रयास को आनंद कुमार सुपर थर्टी ने सराया और देश की विज्ञान पढ़ने की कोशिश को आगे बढ़ाने के लिए अंजन बनिक को आगे बढ़कर देश भर की शिक्षकों की एक मंच बनाकर देश भर की बच्चों को मंच मुहैया कराने की पुरजोर कोशिश में जुड़ने के लिए उनको आमंत्रित किया ।
12 अगस्त को डॉक्टर विक्रम साराभाई जिन्हें देश की अंतरिक्ष विज्ञान की और अंतरिक्ष कार्यक्रमों की जनक माना जाता है उनकी 103 जन्मतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए सुपर थर्टी आनंद कुमार ने यह पहल की ।
सुपर थर्टी आनंद कुमार वर्चुअली इस आयोजन में और भी भारत के दिग्गज अध्यापकों और इसरो के वैज्ञानिकों के साथ मंच साझा करते हुए बोल रहे थे ।
सुपर थर्टी आनंद कुमार सुपर थर्टी आजकल मॉस्को के दौरे पर है । मॉस्को में भारत की अमृत महोत्सव के दौरान आयोजित भारत पर्व शीर्षक आयोजन में वह मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित होकर गए हुए हैं और वहीं से आज शाम को डॉक्टर विक्रम साराभाई जी को श्रद्धांजलि देते हुए वह बोल रहे थे ।
सुपर थर्टी आनंद कुमार जी ने कहा के प्रवचन करते हुए हमारे साधु संत भी कहानियों पर ही निर्भर करते हैं और इसका इस तरह का कहानी ही लोगों के दिल और दिमाग पर असर डालते हैं और सालों तक चीजों को याद रखने में उनको मदद करते हैं । उसी तरह विज्ञान और गणित को समझने के लिए, हमें भी कहानी और खेल को ही माध्यम बनाना होगा । क्योंकि बच्चे कहानी और खेल में ही ज्यादातर रुचि लेते हैं । अगर देखा जाए तो इस 21वीं सदी में भी बच्चे मोबाइल के इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा तर क्षेत्र में खेल के लिए, मोबाइल गेम्स के लिए करते हैं ।
सुपर थर्टी आनंद कुमार जी ने कहा कि हम भी हमारे सुपर थर्टी प्रोग्राम के तहत बच्चों को आईआईटी के लिए तैयार करने की कार्यक्रम में, बच्चों को मोटिवेट करने के लिए, गोलू - मोलू की कहानी को ही चुनते हैं और उसी की माध्यम से विज्ञान और गणित की जटिल से जटिल विषयों को बच्चों के साथ साझा करते हैं और उनके दिलो-दिमाग पर उसकी असर छोड़ने की कोशिश करते हैं, जिसका फल है कि सुपर थर्टी आज दुनिया भर में एक मिसाल की तरह शिक्षण कार्यक्रम बन चुका है ।
सुपर थर्टी आनंद कुमार जी ने कहा सुदूर पूर्वोत्तर की त्रिपुरा की विज्ञान शिक्षक अंजन बनिक जी की अगवाई में भारत के महानतम वैज्ञानिक डॉक्टर विक्रम साराभाई जी की सपनों की भारत बनाने की ओर जो कोशिश उन्हीं की, डॉक्टर विक्रम सराभाई जी कि एकस-भी जयंती पर किया गया और जिस कार्यक्रम का तीसरी वर्षगांठ मनाते हुए बच्चों को प्रेरित करने के लिए इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड दिया जा रहा है, उसमें भी खेल खेल में विज्ञान की तरफ विज्ञान के साथ विज्ञान शिक्षण के लिए शोध कार्य करने की प्रेरणा और साथ में ही अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक लोगों की काम करने की तरीके पर आधारित अंतरिक्ष विज्ञान पर मोबाइल गेम्स ऐप के जरिए बच्चों की विज्ञान की पढ़ाई की रुचि को बढ़ाने की जो को जो कोशिश दूरदराज पूर्वोत्तर भारत के विज्ञान शिक्षक, विज्ञान संचारक अंजन बनिक जी की कोशिश नए भारत को भविष्य में नए-नए क्षेत्र के लिए वैज्ञानिक देने की एक मुहिम है ।
सुपर थर्टी आनंद कुमार जी ने कहा, इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम अगर वैज्ञानिक बनाने की कोशिश होते हुए भी, नए भारत को वैज्ञानिक ना भी दे पाए, फिर भी विज्ञान में रुचि लेने वाले बच्चे और छात्र छात्रों की संख्या में वृद्धि यह कार्यक्रम जरूर करेगा, जो कि भारत के लिए भविष्य में एक विज्ञान जागरूक नागरिक तैयार करने की कार्यक्रम भी हो सकता है, और उसी दिशा में काम करने वाले विज्ञान शिक्षक, सुदूर पूर्वोत्तर की त्रिपुरा की अंजन बनिक जी की कोशिश को एक एक मॉडल कि हिसाब से देखते हुए, देश भर की बाकी विज्ञान संचारक की काम करने वाली शिक्षक वैज्ञानिक लोगों की एक मंच तैयार करने की भी जरूरत आज की इस समय की मांग है ।
12 अगस्त वैज्ञानिक डॉक्टर विक्रम साराभाई जी की जन्म तिथि और भारतवर्ष की स्वाधीन स्वतंत्रता की अमृत महोत्सव की इस अमृत पर्व पर तीसरी वर्षगांठ में इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड प्रदान करने की इस आयोजन में सुपर थर्टी आनंद कुमार और भी भारत के दिग्गज अध्यापकों और इसरो के वैज्ञानिकों के साथ मंच साझा करते हुए बोल रहे थे ।
खेल खेल में विज्ञान सीखते हुए खगोल शास्त्रियों क्षेत्र में भारत की नए भारत के लिए वैज्ञानिक बनने की चाहत रखने वाले बच्चों को प्रेरित करने वाला आयोजन इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड सुदूर पूर्वोत्तर की त्रिपुरा की विज्ञान शिक्षक अंजन बनिक जी की नए भारत को भविष्य में नए-नए क्षेत्र के लिए वैज्ञानिक देने की एक मुहिम है।
नेशनल काउंसिल ऑफ रिसर्चर टीचर साइंटिस्ट - इंडिया (एनसीआरटीएस-इंडिया) विपनेट विज्ञान प्रसार विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की मान्यता-प्राप्त, अध्यापकों, प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, वैज्ञानिकों की अग्रणी सबसे बड़ी परिषद तथा दासा इंडिया के शाखा संगठन, और दासा इंडिया जो कि अग्रणी गैर-लाभकारी, गैर-राजनीतिक, स्वैच्छिक अकादमिक संगठन है और छात्रों और शिक्षकों को प्रेरित करने के लिए, विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित सबसे बड़ा स्वयंसेवी नेटवर्क है, जो कि त्रिपुरा सरकार के सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1861 तहत पंजीकृत है, और जो अपने कार्य क्षेत्र पूरे भारत को अपने मुख्य कार्यालय अगरतला त्रिपुरा से संचालित कर, आगे बढ़ता है । और विपनेट विज्ञान प्रसार भारत सरकार की मान्यता-प्राप्त, राष्ट्रीय स्तर पर देश के छात्र के एकमात्र प्रेरणादायक अग्रणी सबसे बड़ी परिषद, विपनेट विज्ञान क्लबों विपनेट विज्ञान प्रसार विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की मान्यता-प्राप्त - संगठन तथा दासा इंडिया के शाखा संगठन, नेशनल काउंसिल ऑफ स्टूडेंट साइंटिस्ट – इंडिया, तथा राष्ट्रीय छात्र वैज्ञानिक परिषद के अपने प्रेरणादायक समूह आयोजन में एक लोकप्रिय अंतरिक्ष विज्ञान शिक्षा और गणित पर आधारित परीक्षा निरंतर प्रयोग और पर्यवेक्षण निर्भर, और, एस्ट्रो ओलंपियाड आधारित पढ़ाई को प्रेरित करता, छात्र भागीदारी कार्यक्रम मैं आयोजित है ।
इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड 2022, इस तरह का पहला कार्यक्रम है, जिसे रूप दिया है आदरणीय अंजन बनिक जीने। आदरणीय अंजन बनिकजी, जो कि राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ विज्ञान शिक्षक पुरस्कार 2018, साराभाई राष्ट्रीय शिक्षक वैज्ञानिक मानक पुरस्कार 2021, इनोवेशन अवार्ड 2019, संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यावरण दिवस हीरो 2018 और विपनेट सम्मान 2018, से सम्मानित शिक्षक है, जिनकी तहत परिश्रम से, जिनके समग्र विषयगत वैज्ञानिक मार्गदर्शन के तहत, आभासी माध्यम से, DASA इंडिया और उसके शाखा विपनेट विज्ञान क्लबों - संगठनों नेशनल काउंसिल ऑफ रिसर्चर टीचर साइंटिस्ट - इंडिया (एनसीआरटीएस-इंडिया) - राष्ट्रीय शोधकर्ता शिक्षक वैज्ञानिक परिषद - भारत (NCRTS-भारत), , नेशनल काउंसिल ऑफ स्टूडेंट साइंटिस्ट – इंडिया, तथा राष्ट्रीय छात्र वैज्ञानिक परिषद- भारत, विज्ञान लेखक ' एसोसिएशन ऑफ त्रिपुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अवार्ड प्रोग्राम के मुख्य आयोजक निदेशक है, और प्रोग्राम के लिए प्रयासरत है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी की प्रयास से 38 साल बाद भारत में जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आगाज किया गया, उसी दिशा में “खेल खेल में विज्ञान” और “विज्ञान के रुचि को प्रोत्साहन” देने के लिए खगोल विज्ञान के क्षेत्र में विज्ञान शिक्षण और विज्ञान शिक्षण के साथ वैज्ञानिकों की कामकाज की रूपरेखा को जोड़ता हुआ, नए भारत की वैज्ञानिक बनाने की और बनने की चाहत रखते हुए, यह प्रोग्राम का आयोजन 2020 साल से किया जा रहा है । खगोल शास्त्री - वैज्ञानिकों की काम, बच्चों की चाहत के साथ जोड़कर, भविष्य की वैज्ञानिकों की नींव रखने की कोशिश ही है यह प्रोग्राम, इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड, जो कुछ हद तक विश्व में इस तरह की प्रोग्राम की तहत एक अनूठी और अकेला इस तरह का प्रोग्राम है । इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड, इस तरह की एक अनूठी और अकेला प्रोग्राम है, जिसे न केवल वैज्ञानिक बल्कि शिक्षा के साथ जुड़े हुए, देश की जाने-माने संस्थाएं, जैसे की एनसीईआरटी और उसकी शाखाएं जैसे की आर आई ई – अजमेर, आर आई ई – मैसूर, और आर आई ई – भोपाल, अपनी विविध जातीय कार्यशाला में और विविध शोध पत्र व्याख्यान की कार्यक्रम के तहत, इस अनूठी प्रोग्राम इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड, को उचित दर की मानते हुए, मान्यता दी चुकी है ।
भारत की वरिष्ठ वैज्ञानिक जिन्होंने अपना जीवन डॉक्टर विक्रम साराभाई और भूतपूर्व राष्ट्रपति, वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी के साथ बिताया हुआ है, और आपने योगदान से साराभाई जी के सपनों का विज्ञान संस्थान फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्री (पीआरएल) को एक मुकाम पर ला कर रखा हुआ है, भारत के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर प्रभाकर शर्मा जी भी इस मौके पर उपस्थित थे और डॉक्टर विक्रम साराभाई जी की सपना भारत को किस तरीके से आत्मनिर्भर बनाने की और आगे बढ़ाता हुआ ले जा रहा है, इस पर अपनी राय व्यक्त करते हुए बच्चों को तीसरी वर्षगांठ में इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड जीतने पर बधाई देते हुए इस कामयाबी पर सुदूर पूर्वोत्तर की त्रिपुरा की विज्ञान शिक्षक अंजन वनिक जी को भी बधाई दिए।
इस साल की यह पूरा कार्यक्रम “यूट्यूब डॉट कॉम ऑब्लिक यूजारस ऑब्लिक अंजन राइटर” (www.youtube.com/user/anjanwriter) पर उपलब्ध है, और साथ में ही यह इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम से जुड़ने के लिए बच्चे साइटस डॉट गूगल डॉट कॉम ऑब्लिक भीयू ऑब्लिक साराभाई एस एस ए (www.sites.google.com/view/sarabhaissa) इस यूआरएल पर अपने आप को पंजीकृत कर सकते हैं, या फिर फेसबुक डॉट कॉम ऑब्लिक आई आई एस एस एस ए इन त्रिपुरा (www.facebook.com/iisssaintripura) पेज पर भी अपने आप को जोड़ सकते हैं ।
आयोजन में सुदूर अमेरिका से वर्चुअली जुड़े भारत के वैज्ञानिक डॉक्टर भारत भाई चनियारा जी, जिन्होंने 30 साल तक इसरो में अपना जीवन विज्ञान साधना में बिताते हुए डॉक्टर विक्रम साराभाई जी का सपनों का इसरो का एडु - सेट (EDUSAT) मिशन में योगदान रखते हुए देश की शिक्षा प्रणाली को अंतरिक्ष विज्ञान के साथ जोड़ने की कोशिश की, वह भी जुड़े रहे ।
इसरो के साथ जुड़े हुए, पूर्वोत्तर की शिलांग के पास बना हुआ, नॉर्थ ईस्ट स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (Northeast Space Application Center – NESAC) की भूतपूर्व निर्देशक - वैज्ञानिक पीएलएन राजू जी, जो आजकल असम सरकार की असम के मुख्यमंत्री की विशेष विज्ञान और प्रौद्योगिकी सचिव की हिसाब से कार्यरत है, उन्होंने इस इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम में कहा कि, देश की प्रगति में एक नया आयाम देने की जो जिम्मेदारी वैज्ञानिक की है, उसी को निभाने के लिए डॉक्टर विक्रम साराभाई ने भरपुर कोशिश की । और उसी का नतीजा है, आज इसरो न केवल मिशन मंगल और मिशन चंद्रयान तक सफल हो चुका है, बल्कि बच्चों को वैज्ञानिक बनाने की चाहत को देखते हुए, वैज्ञानिक बनने की और बच्चों को मार्गदर्शन देने के लिए, यूबीका जैसे कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है और उसी पैमाने पर सुदूर पूर्वोत्तर की त्रिपुरा की विज्ञान शिक्षक तथा विज्ञान संचारक अंजन बनिक जी की अगवाई में इस इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम डॉक्टर विक्रम साराभाई की 100 भी जयंती की अवसर के बाद से शुरू किया और 2022 में तीसरी वर्षगांठ पर आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड पूरे दुनिया के लिए एक बड़ी मिसाल है ।
आयोजन में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (नेशनल काउंसिल ऑफ एडुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग -एनसीईआरटी) की विज्ञान और गणित शिक्षा विभाग की अध्यापक डॉक्टर टी पी शर्मा जी भी उपस्थित थे और बच्चों को गणित और विज्ञान में रुचि लेने की विविध प्रणालियों पर अपनी राय व्यक्त किए ।
सुपर थर्टी आनंद कुमार जी के साथ काम करते हुए, शिक्षण क्षेत्र को आगे बढ़ाने की काम में जुटी, सुमित फाउंडेशन की निर्देशिका मोना पूरी जी भी बच्चों को तीसरी वर्षगांठ में 50,000 प्रतिभागियों से जूझते हुए इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइकिल साइंटिस्ट अवार्ड जीतने पर बच्चों को बधाई दी ।
इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम द्वारा पूरे साल भर बच्चों प्रेरित करने की मुहिम को रामकृष्ण मठ और मिशन बेलूर मठ की अध्यक्ष महाराज स्वामी स्मरणआनंद जी से और नेशनल काउंसिल ऑफ एडुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग -एनसीईआरटी की रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडुकेशन अजमेर की प्रिंसिपल प्रोफेसर एसपी एस भी शर्मा जी से भी बधाई दी और समर्पित शिक्षक शिक्षकों को स्वागत की ।
नासा की वैज्ञानिक जो कि जॉनसन स्पेस सेंटर से 30 साल से जुड़े हुए हैं, डॉक्टर जॉर्ज शैलीजार भी बच्चों को बारी बारी विविध कार्यक्रमों द्वारा प्रेरित किए ।
इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम में पिछले 6 महीनों से विज्ञान की शोध और वैज्ञानिकों की काम करने की प्रणाली पर बनी हुई, रॉकेट लॉन्च से लेकर दूसरे ग्रहों में अंतरिक्ष यान को उतरने की तरीकों पर बना हुआ, वर्चुअल गेम पर खेल खेल में खगोल विज्ञान सीखने की बहुत ही चरणों में परीक्षा में सफल 12 छात्र छात्रों को तीसरी वर्षगांठ में इस वर्ष इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड से नवाजा गया है ।
इन 12 बच्चे हैं :- तनवी वर्मा, हरीश भी, सानू वर्मा, अंशवीर सिंह बिंद्रा, देवांशी वैभव मेहता, सोमांशु आईकत, प्रगति सुनीता मुश्किन, हरजस सिंह, हिमाद्री गोराना, अनुश्री एस, शुभम दोराई, निकन कालुंदिया ।
सुदूर पूर्वोत्तर की त्रिपुरा की विज्ञान शिक्षक, तथा इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम के निर्देशक अंजन वनिक जी की प्रयास से अमृत महोत्सव के अवसर पर तीसरी वर्षगांठ में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड अगले साल भी आयोजित किया जाएगा ।
अगले साल 2023 साल में चौथी वर्षगांठ में इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड 2023, 1 जनवरी 2023 से एक गूगल फॉर्म http://forms.gle/nnZrKVZEuZbNAXMw9 के जरिए, जिसमें अंतरिक्ष विज्ञान के ऊपर की क्विज तथा प्रश्न उत्तर पर्व लेते हुए और साथ में ही रजिस्ट्रेशन करते हुए, पहले चरण में बच्चों का चयन किया जाएगा, जोकि फर्स्ट जनवरी 2023 को बच्चों के लिए उन्मुक्त रखा जाएगा । सुदूर पूर्वोत्तर की त्रिपुरा की विज्ञान शिक्षक, तथा इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड कार्यक्रम के निर्देशक अंजन बनिक जी ने बताया की पहला जनवरी तारीख न केवल वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस जी का जन्म तिथि है, बल्कि इस कार्यक्रम का प्रेरणा स्रोत सुपर थर्टी आनंद कुमार जी का भी जन्म तिथि है । उसी दिन अगले साल 2023 में चौथी वर्षगांठ में यह कार्यक्रम शुरुआत की जाएगी । जो बच्चे इस आयोजन के साथ जुड़ना चाहते हैं, वह उस फॉर्म के जरिए अपने आप को पंजीकृत कर सकते हैं और एस्ट्रो ओलंपियाड में हिस्सा ले सकते हैं, जो कि एक पहेली चरण होगी और दूसरे चरण में वैज्ञानिकों के साथ मिलकर, उनकी निगरानी में उन्हें अगले साल नेशनल साइंस डे - राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर शोध करना होगा और उसके बाद ही चयन की हुए बच्चों को अगले साल यह अवार्ड दिए जाएगा ।
मंच पर उपस्थित सुपर थर्टी आनंद कुमार जी भी अगले साल की इस आयोजन की शुरुआत की दिन की इस महत्व को समझते हुए चौथी वर्षगांठ में इंडिया इंटरनेशनल स्टूडेंट सेंटर भाई स्टूडेंट सेंटर साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी ।

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